Part 08 I 100 wpm dictation Hindi l 100 wpm typing speed ll Hindi Shorthand II My Shorthand

        स्‍वागत है आपका, आपके अपने इस ब्‍लॉग My Shorthand पर जहां पर आपको उपलब्‍ध कराई जाती है Steno (Shorthand) से संबंधित विभिन्‍न प्रकार की Dictation विभिन्‍न गति के साथ में।      

             दोस्‍तो/मेरे प्‍यारे विद्यार्थीगण, आज की जो ये पोस्‍ट है वह विभिन्‍न प्रकार की स्‍टेनों से संबंधित परीक्षाओं को ध्‍यान में रखते हुए तैयार की गई है एवं इसकी गति के बारे में मैं बताना चाहूंगा कि आप सभी डिक्‍टेशन की 40wpm, 60wpm, 80wpm, 100wpm, 120wpm, 140wpm, 160wpm, में प्रैक्टिस करें जिससे आप अपने मनचाहे सपनों को प्राप्‍त कर सकें।

             यहां पर आपको डिक्‍टेशन के साथ उसका मैटर उपलब्‍ध कराया गया है बहुत जल्‍द ही इन मैटर की Outline भी उपलब्‍ध कराई जाएंगी इसलिए आवश्‍यक है कि आप हमारे You tube पर जुड़े एवं मेरे इस ब्‍लॉग पर भी जुड़े रहे, ताकि आपको और भी सहायता मिल सके स्‍टेनों सीखने में और इस क्षेत्र में कैरियर बनाने में। इसके साथ ही मैं कहना चाहता हूं, कि आप डिक्‍टेशन लिखने के बाद उसका मैटर से मिलान करें एवं जो भी गलतियां हैं, उनमें सुधार करें। यदि कोई परेशानी या सवाल आपके मन में होता है तो Comment के माध्‍यम से आप पूछ सकते हैं।

       यहां पर मैं आपसे एक अनुरोध करना चाहूंगा कि यदि आपको मेरा यह प्रयास पसंद आ रहा है तो मेरे इस Blog  एवं My Shorthand You tube चैनज को अधिक से अधिक दोस्‍तों एवं जिनको स्‍टेनों सीखने की आवश्‍यकता उन सभी को शेयर अवश्‍य करें। धन्‍यवाद।। 



            
    ''महोदय, मुझे इस बात का संतोष है कि राष्ट्रपति जी ने शिक्षा के बारे में अपने भाषण में इस वर्ष विशेष रूप से ध्यान दिया है। हमको दुख के साथ यह स्वीकार करना चाहिए कि आजादी के बाद शिक्षा में जितना सुधार होना चाहिए था वह नहीं हो सका है।// उसके कुछ भी कारण रहे हों, आर्थिक हों या दूसरे, लेकिन यह हमको मानना पड़ेगा कि शिक्षा के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ काम करने को बाकी है। शिक्षा आयोग की रिपोर्ट में जो सिफारिशें हैं उनको तुरंत अमल में लाया जाना चाहिए था परंतु ऐसा नहीं किया गया। इसके(1) कई कारण हैं। योजना आयोग ने और भारत सरकार ने बुनियादी शिक्षा को स्वीकार किया है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि अब वह जमाना नहीं रहा जब कि बुनियादी शिक्षा को सिर्फ कुछ ही क्षेत्रों में चलाया जाए, कुछ ही बेसिक स्कूल खोले जाए। और बाकी स्कूल पुराने ढंग// से चलते रहें भले ही हम उस तरह से शिक्षा न चला सकें जिस तरह से सेवाग्राम में चलती रही हैं, फिर भी जो उसका बुनियादी सिद्धांत है कि उत्पादन के द्वारा शिक्षा देना, उसको संसार के सभी शिक्षा शास्त्री आज मानते हैं।
आज स्कूलों, कॉलेजों की शिक्षा अच्छी नहीं(2) है। यह सभी जानते हैं कि आज की शिक्षा बच्चों को बेकार बना रही है। इसलिए मैं तो यह चाहता हूँ कि जो हमारी शिक्षा हो, जो स्कूल कॉलेज हों, उनमें बुनियादी शिक्षा का सिद्धांत जरूर लागू किया जाना चाहिए। यह नहीं होना चाहिए कि कुछ बेसिक स्कूल खोले जाएं// और बाकी सभी पुराने ढंग पर चलते रहें आज जो बच्चे हैं, उनकी पढ़ाई रुक जाती है। वे कालेज में नहीं जा सकते। मैं समझता हूँ कि हमारा शिक्षा मंत्रालय इसकी तरफ पूरा ध्यान देगा, ताकि राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में जो कुछ कहा है। वह पूरा हो सके(3) और शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन हो सके।
हम यह अक्सर कहते हैं कि जब नई सरकार आती है तो नया झंडा होना चाहिए, लेकिन मैं समझता हूँ कि नई सरकार के आने के साथ नई शिक्षा का आना भी बहुत जरूरी है। राष्ट्रपति जी के भाषण में दलित जातियों// के बारे में भी जिक्र है। मैं उसको बहुत महत्वपूर्ण मानता हॅूं। यद्यपि आज भारत स्वतंत्र है, लेकिन यदि हम हरिजनों की तरफ और जो आदिम जातियां हैं, उनकी तरफ ध्यान नहीं देंगे तो सिर्फ सामाजिक ही नहीं राजनीतिक उलझनों के खड़े होने का डर है। मुझे बहुत खुशी है(4) कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में देश के कोने-कोने से आदिवासी भाग ले रहे हैं। यह न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। हमको समझना चाहिए कि जो आदिवासी लोग हैं, जो आदिवासी क्षेत्र हैं, वे भारत के अभिन्न// अंग हैं। हमें उनको भी यह बतलाना है कि सारा देश उनके कल्याण के लिए और उनकी भलाई के लिए प्रयत्नशील रहता है।473''

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