Stenographer kaise bane II stenographer course II Steno Kya hai ।। स्‍टेेनोग्राफर की तैयारी कैसे करें


         आज की इस पोस्ट में हम स्टेनोग्राफर के ऊपर बात करने वाले हैं कि आखिर स्टेनोग्राफर क्या होता है और कैसे एक स्टेनोग्राफर बनता है।  इसमें हम समझेंगे की स्टेनो क्या होती है एवं इसको जो लिखता है वह स्टेनोग्राफर कैसे बनता है तो   बात करते हैं इस बारे में।

 

    आशुलिपि (शॉर्टहैण्‍ड, स्‍टेनो)  क्‍या है   

जब  किन्ही व्यक्तियों के मध्य भाषा का संवाद ( आदान- प्रदनकम्युनिकेशन)  होता है, तो वह दो माध्यमों से होता है एक माध्यम है मौखिक और दूसरा माध्यम है। लिखित माध्यमों के द्वारा हमारे समस्त कार्य भाषा संवाद के माध्यम से होते हैं।  जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि कोई भी कार्य की वैद्यता  मौखिक की अपेक्षा लिखित रूप में ज्यादा मान्य होती है, किसी भी सरकारी कार्य को लिखित रूप में ज्यादा वैद्य माना जाता है।

            विभिन्न विभागों में कार्य की अधिकता के कारण अधिकारीगण को कम समय में अधिक कार्य को संपादित करना होता है जिस हेतु आवश्यकता होती है कि कोई ऐसा व्यक्ति कर्मचारी हो जो उनके द्वारा बताए गए कार्य को लिखित रूप में कम समय में अधिक से अधिक संपादित कर सके।  इस आवश्यकता को दूर करने के लिए एक खास लिपि का प्रयोग किया जाता है, जिसे  आशुलिपि ( शॉर्टहैण्‍डस्टेनो)  कहा जाता है।  एवं इस लिपि को लिखने वाले व्यक्ति को स्टेनोग्राफर कहा जाता है।  स्टेनोग्राफर द्वारा कम समय में अधिक शब्दों का लेखन किया जा सकता है एवं उसको लेखन करने के उपरांत जिस तरह अधिकारी वक्ता द्वारा शब्द बोला गया है वैसा ही लिखित रूप में ट्रांसलेट करके उसे प्रस्तुत किया जाता है ।

 आशुलिपि में ''वक्ता'' (जिस व्‍यक्ति द्वारा शब्‍द बोले गये हैं) द्वारा  जो  शब्दवाक्य (डिक्‍टेशन)  बोली गई है उसे एक स्टेनोग्राफर द्वारा  कुछ निर्धारित  रेखिए संकेतों का प्रयोग करके आशुलिपि में  कम समय में तीव्र गति से उन शब्दों, वाक्यों को लिखा जाता है एवं इसके उपरांत वह  और देखिए संकेतों को जो आशुलिपि में लिखे गए हैं को हिंदी भाषा में या इंग्लिश भाषा में उसी प्रकार पुनः लिखता है जिस प्रकार ''वक्ता'' (जिस व्‍यक्ति द्वारा शब्‍द बोले गये हैं) द्वारा बोले गए हो। 

 

   आशुलिपि का महत्व एवं उद्देश्य    

 

किसी भी सरकारी विभाग में कार्य की अधिकता के कारण अधिकारीगण को भाषा का प्रतिलेखन करने के लिए गतिशीलता की आवश्यकता जब महसूस हुई तो आवश्यकता इस बात की थी कि कोई ऐसी लिपि तैयार की जाए जो हिंदी भाषा से भी अधिक तीव्र गति से लिखी जा सके। 

             इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए आशुलिपि पद्धति अपनाई गई इसमें अन्य आशुलिपिको द्वारा अलग-अलग  आशुलिपि पद्धति अपनाई गई किंतु सबका मुख्य गुण एक ही है कि कम समय में अधिक से अधिक गतिशीलता के साथ ज्यादा से ज्यादा शब्दों को लिखा जा सके ताकि कम समय में अधिक से अधिक कार्य को संपादित किया जा सके।  

             वर्तमान युग में गतिशीलता की दृष्टि से आशुलिपि की अनिवार्यता बहुत बढ़ गई है चाहे सरकारी कार्यालय हो, साहित्य लेखन होसमाचार पत्र होन्यायालय होविधानसभा या विधान परिषद होसंसद की कार्यवाही होविचार- गोष्ठियों की कार्यवाही हो सभी जगहों पर गतिशीलता के साथ कार्यवाही-भाषण  को लिखने के लिए आशुलिपि का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है।  

 

   आशुलि‍पि (स्टेनो) सीखने एवं सर्टिफिकेट के लिए कोर्स    


Ø   स्टेनो सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा कोर्ट चलाए जाते हैं जिनमें सरकारी संस्थान एवं प्राइवेट संस्थान दोनों ही सम्मिलित होते हैं।  यहां पर यह आवश्यक है कि स्टेनो की जो पढ़ाई है वह रेगुलर माध्यम में ही होती है।

 

Ø    स्टेनोग्राफी का कोर्स 1 वर्षीय होता है जिसमें अभ्यर्थी को आशुलिपि का प्रशिक्षण दिया जाता है एवं हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। 

 

Ø        स्टेनो के लिए सरकारी संस्थानों की बात करें तो सरकार द्वारा विभिन्न शहरों में पॉलिटेक्निक कॉलेजों के माध्यम से 10वीं एवं 12वीं  उत्तीर्ण  अभ्यर्थियों के लिए मेरिट के  आधार पर एडमिशन दिया जाता है एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है और परीक्षा आयोजित कर उत्तीर्ण  छात्रों के लिए  स्टेनो सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है।

Ø    विभिन्न प्रकार के प्राइवेट संस्थानों द्वारा  NCVT (National Council for Vocational Training) से मान्यता प्राप्त कर आईटीआई  इंस्टिट्यूट स्थापित करके स्टेनोग्राफी कोर्स करवाया जाता है जिसमें अभ्यर्थी एडमिशन लेकर एवं  1 वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त कर इसके द्वारा आयोजित परीक्षा में सम्मिलित होने के उपरांत उत्तीर्ण  होकर स्टेनो का सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकता है।

   स्टेनो कोर्स की परीक्षा किस प्रकार आयोजित की जाती है। 

 

Ø    जब किसी अभ्यर्थी द्वारा स्टेनो कोर्स जो कि 1 वर्ष का है किया जाता है तो उसमें निम्नलिखित परीक्षा होती हैं जिनको उत्तीर्ण करने के उपरांत अभ्यर्थी को स्टेनो सर्टिफिकेट प्राप्त हो जाता है।

  स्टेनो परीक्षा के अंतर्गत निम्नलिखित पेपर संपादित किए जाते हैं। 

 1.  स्टेनो आधारित सेक्रेटरी एल असिस्टेंट थ्योरी आधारित पेपर

2.  कंप्यूटर आधारित पेपर।

3.  हिंदी एवं अंग्रेजी टाइपिंग आधारित पेपर।

4.  स्टेनो  स्किल टेस्ट आधारित पेपर। 

 

    स्टेनोग्राफर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता    

 

Ø स्टेनोग्राफर बनने के लिए 10+2  उत्तीर्ण होना आवश्‍यक है। 

Ø स्टेनोग्राफी में 80 शब्द प्रति मिनट एवं  कुछ नौकरी में 100 शब्द प्रति मिनट  का  डिप्लोमा/सर्टिफिकेट  होना आवश्यक है। ( कुछ स्टेनोग्राफर के पदों पर स्टेनोग्राफी का सर्टिफिकेट होना आवश्यक नहीं है वहां पर आपका स्टेनोग्राफर स्किल टेस्ट लिया जाता है यदि आप उस में उत्‍तीर्ण होते हैं तो   भी आप  स्टेनोग्राफर बन सकते हैं)

Ø कुछ विशेष सरकारी पदों में स्टेनो की गति 140 से 160 शब्द प्रति मिनट भी चाहिए होती है।

Ø स्टेनो के अलावा टाइपिंग में 30 शब्द प्रति मिनट का सर्टिफिकेट होना भी अनिवार्य है।

 

सरकारी संस्थानों में स्टेनोग्राफर चयन प्रक्रिया

Ø  सरकारी संस्थान द्वारा स्टेनोग्राफर की नियुक्ति के लिए नोटिफिकेशन/ एडवरटाइजमेंट जारी किया जाता है जिसके माध्यम से योग्य स्टेनोग्राफर पद हेतु आवेदन फॉर्म प्राप्त किए जाते हैं।

Ø   

Ø   आवेदन प्राप्त होने के उपरांत इस पद हेतु  प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की जाती है।  जो निम्न 2 चरणों में (किन्‍ही विभागों में 3 चरणों में भी) संपन्न होती है 

Ø  प्रथम चरण:-  सरकारी संस्थान द्वारा स्टेनोग्राफर के लिए एक बहुविकल्पीय लिखित परीक्षा आयोजित की जाती है जिसमें 100 या 200 नंबर का  पेपर होता है।  इसमें उत्तीर्ण उम्‍मीदवारों को  मेरिट के आधार पर द्वितीय चरण की परीक्षा में सम्मिलित किया जाता है।

Ø   द्वितीय चरण:-   लिखित परीक्षा में उत्‍तीर्ण उम्‍मीदवारों  को आशुलिपि (स्‍टेनो)  का लिखित स्किल टेस्ट देना होता है।  एक लिखित स्किल टेस्ट में उतरी छात्रों में से मेरिट के आधार पर सरकारी संस्था में रिक्त पदों  की संख्या के आधार पर चयन किया जाता है। 

Ø  नोट:-  कुछ संस्थानों में मात्र प्रथम चरण जोकि लिखित परीक्षा के माध्यम से ही स्टेनोग्राफर के पद पर नियुक्ति की जाती है।  कुछ संस्थानों में 3 चरणों में क्रमश:  लिखित परीक्षास्टेनो स्किल टेस्ट एवं तृतीय चरण इंटरव्यू के माध्यम से नियुक्ति प्रदान की जाती है। 

 

 स्टेनोग्राफर के लिए रोजगार के क्षेत्र

 

1. 10वीं या 12वीं पास अभ्‍यर्थी जो स्‍टेनों का सर्टिफिकेट प्राप्‍त किए हैं  उनके लिए 80 शब्द प्रति मिनट की गति के  आधार पर पुलिस विभाग में उप निरीक्षक  आशुलिपिक पुलिसनिम्न श्रेणी लिपिक (LDC),  लोक सेवा आयोगकर्मचारी चयन आयोग, बीमा विभागन्याय विभाग  एवं विभिन्न राज्य की सरकारी संस्थाओं मेंनिजी संस्थाओं मेंसचिवालय में स्टेनो टाइपिस्ट  एवं स्टेनो प्रशिक्षण संस्थाओं में रोजगार का अवसर प्राप्त होता है।

2.  स्नातक उत्तीर्ण छात्र आशुलिपि में100-120  शब्द प्रति मिनट की गति से सरकारी व सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यकारी सहायकउच्च व्यक्तिक सहायकव्यवसायिक अनुदेशक, प्रशिक्षण अधिकारीसहायक निदेशक(आशुलिपि)न्यायपालिका में कुछ आशुलिपिक  इत्यादि पदों पर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकता है।

3.  स्नातक उत्तीर्ण छात्रों आशुलिपिक में 140 शब्द प्रति मिनट की गति प्राप्त कर संसदराज्यसभाराज्य विधान सभा के प्रत्यक्ष चयन द्वारा रिपोर्टर का पद प्राप्त कर सकता है।  रिपोर्टर का पद राजपत्रित होता है आशुलिपि प्रशिक्षित छात्र सीधे ही इन विभागों में राजपत्रित पद प्राप्त कर सकता है किन्ही विभागों में पदोन्नति के माध्यम से भी राजपत्रित पद प्राप्त किया जा सकता है।

4.  रोजगार के क्षेत्रों के अतिरिक्त कोई भी प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थी स्वयं का  प्रशिक्षण संस्थान खोलकरवाणिज्यिक संस्थानकॉल सेंटर आदि में रोजगार प्राप्त कर सकता है एवं स्वरोजगार भी कर सकता है।। 



आप मेरे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी कमेंट करें। ब्‍लॉग को सब्‍सक्राइव करें एवं मेरे You tube Channel को सब्‍सक्राइव करें। क्‍योंकि आप वहां से घर बैठै स्‍टेेनों सीख सकते हैं। 

Post a Comment

0 Comments

Basic Hindi Typing Practice Matter सर सरा सरकार साही हक काका