Basic Hindi Typing Practice Matter सर सरा सरकार साही हक काका

 

नमस्‍कार स्‍टूडेण्‍ट्स,

         कुछ समय पहले मेरे You tube Channel पर एक कुछ Student’s द्वारा Comment किया गया था कि सर हम कैसे घर बैठे हिन्‍दी टाईपिंग सीख सकते हैं जबकि हमने इससे पहले कभी भी हिन्‍दी टाईपिंग न की हो।

    प्रिय अभ्‍यर्थीगण आज की यह पोस्‍ट इसी को लेकर तैयार की गई है कि आखिर घर बैठे ही कैसे हम हिन्‍दी टाईपिंग सीख सकते हैं।

    हिन्‍दी टाईपिंग सीखने के लिए सबसे पहले हमें हिन्‍दी के वर्णों का ज्ञान होना चाहिए कि आखिर की-बोर्ड के किस “Key” कौनसा वर्ण बनता है। जब हमें यह पता हो जाता है कि किस “Key” कौनसा वर्ण बनता है। तो हम फिर आसानी से हिन्‍दी टाईपिंग सीख सकते हैं।

ध्‍यान देने वाली बात:-

v नीचे आपको कुल 6 अभ्‍यास वर्णों को की-बोर्ड पर पहचानने के लिए दिए गए है, जिनमें से प्रत्‍येक का अभ्‍यास कम से कम 3 से 4 दिन करना ही है।

v यहां पर यह भी ध्‍यान रखना है कि 1 अभ्‍यास को लगातार 3 से 4 दिन करने के बाद ही दूसरा अभ्‍यास करना है फिर 3 से 4 दिन बाद तीसरा और ऐसे ही प्रत्‍येक अभ्‍यास को 3 से 4 दिन तक करने के बाद ही आगे के अभ्‍यास का करना है।

v जब आप आगे के अभ्‍यास करेंगे तो आपको जो अभ्‍यास आप कर रहे हैं, उसके पहले वाले सभी अभ्‍यास भी प्रतिदिन करने हैं ताकि आप इस अभ्‍यास से पहले वाले अभ्‍यास भूल न जायें।

v गलती से भी ऐसा न करें कि 1 अभ्‍यास के बार दूसरे ही दिन 2 अभ्‍यास और तीसरे दिन 3 अभ्‍यास करने लगे इससे आपकी प्रैक्टिस अच्‍छी नहीं होगी और आप टाईपिंग तो सीख जाएंगे लेकिन आप स्‍पीड में टाईपिंग नहीं सीख पाएंगे।

 

  आपको की-बोर्ड पर हिन्‍दी टाईपिंग सीखने के लिए नीचे दिए गए चित्रानुसार अपनी ऊंगलियों को रखना है और नीचे दिए अभ्‍यासों की प्रैक्टिस करना है और जब आप अच्‍छे से इनकी प्रैक्टिस कर लें तो फिर मैटर के अभ्‍यास के लिए आप Online India Typing पर प्रैक्टिस कर सकते हैं, या JR Typing Software का प्रयोग करके उस पर भी टाईपिंग कर सकते हैं।

अभ्‍यास क्रमांक - 1

ंेकहिीह श्‍यसारा  ंेकहिीह श्‍यसारा  ंेकहिीह श्‍यसारा  

सर सरा सरकार साही हक काका कह रहा हे कि यह केसा हाहाकार हो रहा हे। यह काकी सरकार का ही साही से कर कह कहा हे। यह केसा संहोह हे। कि किससे रिसकार कर रहा हे। हरे यार ये रसकार कया कर रहा हे। काकी कहर का कहा करो यार सरकार का ही हे। सरकार का संसार सकर कंकर का सही का सरकारी कराह हाहाकार का हीरा करा रहा हे। यही से सोही की सही हेर हे। सही को साही से कया करके सरकार का सही से श्किार श्यिार से सही करा रही हे। सरकार का साही सही तो यहीं कहकर करा करो यही सही सकर हे।

अभ्‍यास क्रमांक – 2

ौक्‍थ्‍ळभ्‍ळ ष्‍रूस्‍ज्ञश्रज्ञ  ौक्‍थ्‍ळभ्‍ळ ष्‍रूस्‍ज्ञश्रज्ञ  

सरकार ही शक्‍कर का हास कर रही है। शंका हो रही है कि क्‍या हो रहा है। क्‍यों हरिहर से कार का भार कर रहा है। श्रीहीर ज्ञारस के साथ कहे। शायर से सरकार क्‍या है रास के हक की भारिका के साथ रू से कर रहा है। कारस या किसी के साथ हो ही रहा है। यहीं सही है कि क्‍या शंकर के साथ क्‍या होकर ही रहा है। ज्ञाकश्री के साथी का क्‍या शंकर के साथ क्‍या होकर ज्ञारस को हाकर ही रहा है। हेयार यहीं साहस का भार करो। यह सरकार संसार का भार है सो यही से सरकार काहे हो करे रोक रही है। या करो या रिश्‍कार करो स्किी का ही करे। ज्ञारास का सही से होकर ही रहा है। या कहीं कर या सही हो तो कारास का ही थक्‍कर कहा कि किया करो। किसी को साथ करके किया करो। क्‍या कर रहा है। क्‍या करके रोक रहा है। 

अभ्‍यास क्रमांक – 3

ुूमतजलज ,ख्‍चवपनप ुूमतजलज ,ख्‍चवपनप

माताजीपिताजीमामाजीमामीजीनानाजीनानीजीचाचाजी, चाचीजी चाय पी रही है। सुपर काम सही से सभी करते हैं। पहली बार मिलने से हो कैसे से नमस्‍कार करना चाहिये। हस्तिनापुर मेरी बात का ही है कि काका ने मेरे मामाजी से कहा कि हमारे चुख्‍खन पुचकारी कहां से लायेंपरन्‍तु यहां पर कार्य से काम नहीं चलता है। कारन कि श्रावन की रात के काम है। कहना कि वह साये हैं जो कि नानी ने कहानी से सभी को सुनाकर सुलाया था। चूंकि कनक लेते रहो। कहा हो रहा है। माताजी में पिताजी की पविता शक्ति के लिये जा रहा हूँतुम यहीं कह सकते कि वह क्‍या कर रहा है। यदि वह संभावना होता तो मैं जरूरत से जरूर रूपये लेता रहूं। क्‍या काम नहीं रहो रहा है। यदि यह संभावना होता तो मैं जरूरत काम करां दूंगा। क्‍या क्षय क्षयकार नहीं होना चाहिये। द्वारा से द्वारा पर काम पूरा नहीं करें तो सभी को मार खानी होती है।

अभ्‍यास क्रमांक – 4

फॅम्‍त्‍ज्‍ल्‍ज्‍ द्वक्ष्‍च्‍व्‍प्‍न्‍प्‍  फॅम्‍त्‍ज्‍ल्‍ज्‍ द्वक्ष्‍च्‍व्‍प्‍न्‍प्‍

मानवता का यह भारत जो कि विश्‍व शांति व मानव जाति कल्‍यान के लिए जो काम किया वह सराहनीय रहा है क्‍यों रे लज्‍जा नहीं हो रहे है। वैसे जो काम हुसेन ने किया वह तारीफ काविल नहीं हो सकता। नन्‍ही को कैसे विश्‍वास करायें कि क्षत्रीय लोहा लेते समय कभी नहीं सोतेसमय की विचार करके ही वह कार्य करते हैं वह क्‍या नहीं कर लेते। हंसते-हंसते खेलतेसोते यहां तक कि बार-बार जोकर का कार्य करते हैं व चूकते नहीं है। मम्‍मी का काम स्‍वयं करना द्वापर पर विद्यालय से जाकर करना व सही को सभी तरह से खुश करना कितना सही होता हैरूप की लाली सभी प्रकार से सहज व सही होती है। सफल होने के हित में सही कार्य करो। व्‍यायाम शक्ति का व मुक्ति को व्‍युत्‍पन्‍न करता है। खरसापुरविल्‍लारीकलकत्‍ता व चैन्‍नये जाना सच्‍ची संकल्‍पना हो सकती है। विल्‍लारी व पुल्‍लायविद्यालय से होकर ही जाना ही सही है। किसी को न सतायें तो सही है।

अभ्‍यास क्रमांक – 5

्रगबअइअ ध्‍ण्‍एउदउ ्रगबअइअ ध्‍ण्‍एउदउ

 व्‍यायाम हमारे शरीर को शक्तिशाली बनाता है जिससे शरीर गई रोगों से मुक्‍त होता है। आये दिन ऐसे बच्‍चों के उदाहरण हमारे सामने आते ही रहते हैं जो गलत रास्‍ते पर चलने लगते हैं। बच्‍चों में अपराध करने की आदत क्‍यों उत्‍पन्‍न होती है। प्राय: सभी परविारों में बालक इस दृष्टिगत आदत से ग्रस्‍त रहते हैं। कोई कहता है किगरीबी के कारण बालक माता-पिता को चारित्रिक दोषों के कारण बालक में अपराध भावना का उदय होता है। धनवान होता जितना सही है उत्‍तरार्ध उससे कहीं अधिक गरीबी होना बुनसूर से बुरा है। बाल अपराध की समस्‍या सबसे अधिक विदित होती हैं भारत की अधिकांश जनता मध्‍य वर्ग का प्रतिनिधित्‍व करती है। कितने आश्‍चर्य की बात है कि भारत जैसी कृषि प्रधान देश आज लगता है। ऐसा लगता है कि उसे अन्‍त तक देखता रहूँ। प्राय: ऐसी सुन्‍दरता कम ही देखने को मिलती है। सिसकना व रोना में क्‍या अंतर हो सकता है? विद्यालय जाते समय ऐसा महसूस होता है कि जैसे हम कोई पुण्‍य लाभ के लिए जा रहे हों। हमारी भावनाएं स्‍वच्‍छ और सुंदर रूप धारण कर लेती है। 

अभ्‍यास क्रमांक – 6

र्ग्‍ब्‍टठट ध्‍ण्‍एडछड र्ग्‍ब्‍टठट ध्‍ण्‍एडछड र्ग्‍ब्‍टठट ध्‍ण्‍एडछड र्ग्‍ब्‍टठट

वह रोज पहलवानी ही नहींगौमाता की सेवा कर पुण्‍य लाभ कमाता है। न्‍यायालय में ईश्‍वर को साक्षी लेकर सच करे झूठ और झूठ को सच बनाया जाता है। गवाही सच्‍ची अथवा झूठी इस बात से बनती है कि गवाह कितने आत्‍मविश्‍वास से सहारे झूठ बात को सत्‍य के समान कह सकता है और वकील सच्‍ची गवाही को जिरह द्वारा तार-तार कर सकता है। झूठी बात को किसी के विरूद्ध न्‍यायालय में नही रखना चाहिय। आजादी का अर्थ स्‍वतंत्रता और क्रांति का अर्थ- तब्‍दीली परिवर्तन है। अंग्रेजों का शासन परिवर्तित हो गयाकिन्‍तु इस माँ भारती के दो टुकड़ों पर दो सरकारे कायम कर दी गयी और मुल्‍क के भोले-भोले नागरिकों को बहका दिया गया कि वे आजाद हो गये है मगर नहींबड़े-बड़े माहात्‍माओं का आयोजन किया जाने लगा और महात्‍माओं ने अब्‍बल दर्जे के व्‍याख्‍यान दिये। कोई मनुष्‍य घोड़े की सबारी व्‍यर्थ नहींप्रमाण-हारक भी है। हमारा राष्‍ट्र महान हैराष्‍ट्रीय अन्‍याय का अन्‍त करने को बाध्‍य करना होगा।

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