नमस्कार दोस्तो,
स्वागत है आपका, आपके अपने इस ब्लॉग My Shorthand पर जहां पर आपको उपलब्ध कराई जाती है Steno (Shorthand) से संबंधित विभिन्न प्रकार की Dictation विभिन्न गति के साथ में।
दोस्तो/मेरे प्यारे विद्यार्थीगण, आज की जो ये पोस्ट है वह विभिन्न प्रकार की स्टेनों से संबंधित परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है एवं इसकी गति के बारे में मैं बताना चाहूंगा कि आप सभी डिक्टेशन की 40wpm, 60wpm, 80wpm, 100wpm, 120wpm, 140wpm, 160wpm, में प्रैक्टिस करें जिससे आप अपने मनचाहे सपनों को प्राप्त कर सकें।
यहां पर आपको डिक्टेशन के साथ उसका मैटर उपलब्ध कराया गया है बहुत जल्द ही इन मैटर की Outline भी उपलब्ध कराई जाएंगी इसलिए आवश्यक है कि आप हमारे You tube पर जुड़े एवं मेरे इस ब्लॉग पर भी जुड़े रहे, ताकि आपको और भी सहायता मिल सके स्टेनों सीखने में और इस क्षेत्र में कैरियर बनाने में। इसके साथ ही मैं कहना चाहता हूं, कि आप डिक्टेशन लिखने के बाद उसका मैटर से मिलान करें एवं जो भी गलतियां हैं, उनमें सुधार करें। यदि कोई परेशानी या सवाल आपके मन में होता है तो Comment के माध्यम से आप पूछ सकते हैं।
यहां पर मैं आपसे एक अनुरोध करना चाहूंगा कि यदि आपको मेरा यह प्रयास पसंद आ रहा है तो मेरे इस Blog एवं My Shorthand You tube चैनल को अधिक से अधिक दोस्तों एवं जिनको स्टेनों सीखने की आवश्यकता उन सभी को शेयर अवश्य करें। धन्यवाद।।
''उपाध्यक्ष महोदय, मुझे पूरा विश्वास है कि माननीय सदन मेरे प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करेगा। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि माननीय सदस्य अपने दल की राजनीति से ऊपर उठकर खुले दिल और दिमाग से इस प्रस्ताव पर चलने वाली बहस में भाग लेंगे। मैं इसी विश्वास के साथ अपने विचार सदन में रखने जा रहा हूं। भारत का इतिहास दुनिया के लोगों से छिपा नहीं है। भारत की भूमि से मानवता का संदेश, आदि बहुत सी चीजें दुनिया में फैलीं। एक समय था जब हमारी सभ्यता और हमारी शिक्षा की बातें पूरे संसार में हुआ कती थीं। हमारे देश में वेद लिखे गए जिसने संसार को मानवता का संदेश दिया और कहा कि पूरे संसार को एक परिवार मानकर चलो। अभी हमारे माननीय सदस्य ने बताया और मैंने अभी देखा है कि सदन के भवन में भी ये बातें लिखी हुई हैं। मैं यह अभिमान तो नहीं करता कि विद्वान केवल भारत में ही हुए। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में हम संसार के गुरू रहे हैं। हमने ही चार अच्छी परम्परा संसार को दीं। यदि इसी को मान लिया जाए तो पूरे संसार की जनसंख्या की समस्या हल हो जाती है। लेकिन दुर्भाग्य से वह भारतवर्ष जिसकी शिक्षा ने पूरे संसार को प्रभावित किया वही जाति की बुराई का शिकार हो गया। हो सकता है कि किसी समय इसकी आवश्यकता रही हो। मैं उस विषय पर आज यहां कुछ नहीं कहना चाहता लेकिन निश्चित रूप से जिस समय हमने यह निश्चय कर दिया कि हरिजन भाइयों को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं है, वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है उसी समय से हमारा पतन आरम्भ होता है। हमारा पतन यहां तक हुआ कि हमने गुलामी की एक लम्बी यात्रा की।
मैं इतिहास का विद्वान नहीं हूं। लेकिन ऐसा सुनने में आया है कि जितने लम्बे समय तक भारत वर्ष गुलाम रहा। शायद इतने समय तक दुनिया का कोई देश गुलाम नहीं रहा। थोड़े से अंग्रेजों ने ही हमंे गुलाम बना लिया था। लेकिन उस अंधेरे में एक उजाला आया। कोई दो सौ वर्ष पहले शिक्षा के बारे में सोचा गया। अंग्रेजों को इसकी आवश्यकता इसलिए थी कि भारत को लम्बे समय तक गुलाम रख सकें। उन्होंने एक ऐसी शिक्षा प्रणाली चलाई जिससे कि उनको सस्ते क्लर्क और सरकारी नौकर मिल सकें।''
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