''माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने व्यस्त समय में से कुछ समय हमारे लिए निकाला, इसके लिए हम आभारी हैं और अब मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि इस सम्मेलन में आए हमारे साथियों तथा अधिकारियों का मार्गदर्शन करें।
गृहमंत्री जी के स्वागत भाषण के बाद प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने दृढ़// और विश्वास भरे शब्दों में सम्मेलन में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित किया। संक्षेप में उन्होंने कहा कि भारत में बहुत सी भाषाएँ बोली जाती हैं लेकिन हिन्दी को सबसे ज्यादा लोग समझते हैं और बोलते हैं। इसलिए हिन्दी को हमने राजभाषा बनाने के लिए चुना है। यही नहीं हिन्दी का(1) एक अपना इतिहास भी है और हमारी यह कोशिश रहेगी कि देश में सब लोग हिन्दी बोलने और समझने लगें। इस दिशा में काफी काम भी हुआ है, लेकिन जैसा कि अभी गृहमंत्री जी ने कहा है कि जिस गति से और जिस तेजी से काम होना चाहिए था, शायद// नहीं हो पाया है।
कल हमारा एक दूसरा सम्मेलन हुआ था। उसमें भी कई मुद्दे उठाए गए थे। एक मुद्दा जो सामने उभरकर आया वह यह था कि आज भी सरकार का काम उचित भाषा में हिन्दी में नहीं हो पा रहा है जबकि जो आंकड़े पेश किए गए थे(2) उसके हिसाब से किसी विभाग में 90 प्रतिशत, किसी में 98 प्रतिशत और किसी में 95 प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी को हिन्दी का कार्य-साधक ज्ञान था हमें यह सोचना होगा कि ऐसा क्यों हो रहा है? यदि लोग हिन्दी समझते हैं तो हिन्दी में काम क्यों नहीं हो पाता? क्या// हमारे आंकड़े केवल प्रोत्साहन भत्ता लेने के लिए ही हैं। यदि हिन्दी का प्रचार होना है और हिन्दी में काम होना है तो हमें अच्छी तरह से हिन्दी की जानकारी करनी होगी। खासकर जब कानूनी काम और संसद का काम होता है। हमें यह भी सोचना होगा कि हम किस(3) कारण से इस दिशा में पीछे रह गए हैं? कहाँ पर हमने ध्यान नहीं दिया और उसे ठीक करने के उपाय भी सोचने होंगे। हिन्दी का प्रचार करते हुए हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि दूसरी भाषा बोलने वाले लोगों का यह अनुभव नहीं होना चाहिए कि उनके// ऊपर हिन्दी जबरदस्ती थोपी जा रही है, क्योंकि अगर उन्हें यह लगा तो वे विरोध करेंगे। जो काम हम प्यार से और समझाकर कर सकते हैं, वह जबरदस्ती करने से नहीं हो पाएगा। इस बात को अच्छी तरह से समझकर ही हमें हिन्दी का प्रचार करना है। साथ-साथ हमें यह(4) भी देखना है कि भारत जैसे बड़े देश जिसमें इतनी भाषाएँ बोली जाती हैं वहाँ यह भी आवश्यक है कि एक भाषा ऐसी हो जिसे सब लोग समझें और जो पूरे देश को एक सूत्र में बांध सकें। हमने इसके लिए हिन्दी को चुना है। 445''
0 Comments