Part 14 I 100 wpm dictation Hindi l 100 wpm typing speed ll Hindi Shorthand



            ''उप-सभापति जी, मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि विकास के लिए हम जिस मात्रा में पूंजी लगा रहे हैं उस मात्रा में हमारे देश में उत्पादन में वृद्धि नहीं हो रही है। लोगों की क्रय की शक्ति बढ़ रहीं है, लेकिन उसके अनुसार बाजार में माल नहीं आ रहा है।// मैं यह भी कहना चाहता हॅूं कि इतना कहना ही पर्याप्त नहीं होगा कि मूल्यों को कम करने के लिए उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है। यह ऐसी चीज है जिसमें किसी का मतभेद नहीं हो सकता है। देखने में यह आता है कि सरकार की नीतियाँ मूल्यों को बढ़ाने में सहायक(1) होती हैं, लेकिन उनसे उत्पादन में वृद्धि नहीं होती है। मैं चाहता हूँ कि इस बात पर गंभीरता से विचार किया जाए कि माल को इधर-उधर ले जाने में जो किराया देना पड़ता है उसके कारण मूल्यों में वृद्धि होती है। मुझे आश्चर्य है कि वित्त मंत्री ने अपने भाषण// में यह तो कहा है कि मूल्य वृद्धि से उन्हें चिंता हो रही है किन्तु मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए जा रहे हैं इस संबंध में वित्त मंत्री अपने आप में भी स्पष्ट नहीं हैं। मैं उनके इस कथन से सहमत नहीं हूँ कि थोक(2) मूल्यों में करीब आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साधारण लोगों का जीवन बाजार भाव से चलता है। मुझे आश्चर्य है कि उन्होंने अपने भाषण में एक वाक्य ऐसा कहा है कि जिसका प्रयोग दूसरी जगह भी किया जा सकता है। 
अपने बजट में वित्त मंत्री ने विदेशी पूंजी को// अधिक मात्रा में निमंत्रण देने की बात कही है। आज हमारे देश के आर्थिक विकास की जो स्थिति है उसमें बिना विदेशी पूंजी के हम नहीं चल सकते। लेकिन विदेशी पूंजी बड़ी मात्रा में देश में आए, इसके जो खतरे हैं उनको आंख से ओझल नहीं किया जाना चाहिए। यह(3) बात अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है कि हम जो विदेशी पूंजी देश में लाना चाहते हैं वह किन शर्तों पर लाना चाहते हैं। उद्योग धंधों में, कल-कारखानों में विदेशी पूंजी का हिस्सा बहुत कम है, यह बात वित्त मंत्री ने कही है। ध्यान देने की बात यह है कि// विदेशी पूंजी पर हमारे देश में जो मुनाफा हो रहा है वह अन्य देश की तुलना में काफी है और यदि विदेशी पूंजी मुनाफे के लिए देश में आना चाहती है तो उसे अभी काफी सुविधाएँ दी जा रही हैं। मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान इस बात की(4) ओर भी दिलाना चाहता हूँ कि हमारे देश में धन कुछ ही हाथों में इकट्ठा होता जा रहा है। यह स्थिति ठीक नहीं है। सरकार को गंभीरता के साथ इस समस्या पर विचार करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि हमारे देश का धन कुछ ही पूंजीपतियों के हाथों में// न जाने पाए। सरकार ने इस संबंध में कुछ कदम उठाए हैं। पूंजी को कुछ ही हाथों में जाने से रोकने के लिए सरकार को प्रयत्न करना चाहिए। 479''

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