Part 1 II Court Dictation Matter 80 wpm dictation hindi l 80 wpm typing speed l Hindi Shorthand Dictation II My Shorthand





            ''अपीलार्थी की ओर से अपील ज्ञापन में बताये आधारों पर विचारण न्यायालय द्वारा पारित आलोच्य निर्णय व आज्ञप्ति को प्रश्नगत किया गया है। अपीलार्थी की आरे से तर्क के दौरान व्यक्त किया है कि वादी की ओर से लगायत 3/ के दस्तावेज व मौखिक साक्ष्य कब्जे के संबंध में पेश की गई थी जिस पर विचारण न्यायालय में गंभीरता से विचार नहीं किया न ही विश्वास किया। आलोच्य निर्णय उक्त आदेश के आधार पर लिखा गया है, जबकि वादी ने(1) अपनी साक्ष्य से अपना वाद पूर्णतया प्रमाणित किया है। अतः विचारण न्यायालय द्वारा पारित आलोच्य निर्णय एवं तथ्य विधिविरूद्ध होने से निरस्त किये जाकर अपीलार्थी की अपील स्वीकार कर वाद विचार किये जाने का निवेदन किया है।
आवेदक साक्षी ने/ आवेदक की ओर से किये गये प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि उसका पुत्र जन्मजात से विकलांग होकर चलने में असमर्थ है। उसके तथा अनावेदक के खेत पर जाने का एक ही रास्ता है। इस बात को भी अस्वीकार किया(2) है कि रास्ते को लेकर उनके बीच विवाद है। इस साक्षी ने घटना की रिपोर्ट दिनांक 07.03.2012 को की जाना बताया है किंतु अपने पुत्र व अपनी जन्म दिनांक के संबंध में कोई तिथि नहीं बता पाया है। साक्षी का/ कथन है कि उसने डाॅक्टर को   घटना के बारे में बता दिया था। डाॅक्टर ने घटना की कोई सूचना थाने में नहीं दी थी। इसके विपरीत अनावेदक ने अपने कथन में बताया है कि प्रश्नगत वाहन से कोई दुर्घटना नहीं(3) हुई थी। आवेदक द्वारा उसके विरूद्ध असत्य प्रकरण पेश किया गया है। आवेदक की ओर से किये गये प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने स्वीकार किया है कि उसके विरूद्ध पुलिस द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है, किंतु स्वतः साक्षी का कथन/ है कि प्रकरण का फैसला हो गया है और वह दोषमुक्त हो गया है।
तर्क के दौरान अपीलार्थी के विद्वान अभिभाषक द्वारा माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा अपील पारित निर्णय दिनांक 05.06.2017 की प्रतिलिपि प्रस्तुत करते हुए तर्क किया गया है(4) कि अपीलार्थी ने चेक राशि एवं न्यायालय द्वारा निर्णय में उल्लेखित ब्याज राशि जमा कर दी है। अतः माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त निर्णय अनुसार वह उन्मुक्ति या दोषमुक्ति का पात्र है। इस तर्क पर विचार किया जाये तो विचारण/ न्यायालय के अभिलेख अनुसार दिनांक 31.06.2016 को प्रकरण के लंबित रहने के दौरान अभियुक्त कथन के प्रक्रम पर चेक राशि एक लाख रूपये न्यायालय में जमा की है। उस समय न्यायालय द्वारा न तो ब्याज पर प्रतिकर की कोई गणना(5) की गई थी और न ही अभियुक्त की ओर से ऐसा कोई आवेदन प्रस्तुत किया गया था कि प्रतिकर या ब्याज की गणना की जाये और वह जमा करने के लिए तत्पर है, जबकि प्रथम न्यायदृष्टांत में विचारण न्यायालय के/ समक्ष अभियुक्त की ओर से ऐसा निवेदन किया गया था।''

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